हाय, मैं अनु हूँ. मैं 26 साल की हूँ.
ये मेरी पहली न्यू गर्ल फक स्टोरी है.
मुझे फक स्टोरी लिखने का कोई एक्सपीरियंस नहीं है, पर ये एक सच्ची घटना है जो आज से एक साल पहले की है.
मैं अपने पैरेंट्स के साथ रहती थी. मेरा भाई उस समय घर पर ही रहता था.
मेरे ही घर में हमने ऊपर वाला फ्लैट अपने दूर के रिलेटिव को रहने के लिए दिया था.
वे एक न्यूली मैरिड कपल थे.
मैं उन्हें भैया-भाभी कहती थी.
उनकी शादी को अभी एक साल ही हुआ था.
हम दोनों के परिवार की आपस में बहुत अच्छी बनती थी.
कभी वे दोनों हमारे यहां खाने आते थे, तो कभी भाभी हमारे लिए खाना लाती थीं.
बात उन दिनों की है जब भाभी एक महीने के लिए अपने मायके गई थीं.
अब भैया अकेले रहने वाले थे तो मम्मी ने उन्हें अपने यहां खाने के लिए कहा था.
वे ऑफिस से आने के बाद कपड़े बदल कर नीचे आते और पापा के साथ खाते थे.
भैया की उम्र कोई 30-31 होगी.
वे काफी स्वस्थ शरीर के थे और 6 फीट लंबे थे.
मम्मी-पापा से मेरी उम्र का काफी बड़ा अंतर था तो भैया से मेरी काफी बातें होती थीं.
भाभी के जाने के बाद भैया काफी उदास रहने लगे थे.
मैंने देखा कि वे काफी समय ऑफिस में ही बिताते थे.
एक दिन मैंने उनसे पूछा- आप ऐसे क्यों रहते हैं?
उन्होंने बात टाल दी.
मैंने भी उस दिन कुछ ज़्यादा नहीं पूछा.
फिर 2-3 दिन बाद भैया शाम को जल्दी घर चले आए.
उस दिन वे काफी डिस्टर्ब लग रहे थे.
मैंने उनसे बात करने की सोची.
उनके जाने के थोड़ी देर बाद मैं ऊपर की मंजिल में बने उनके कमरे में चली गई.
उस वक्त भैया अपने बेड पर लेटे हुए थे.
मैंने आवाज़ दी तो उन्होंने आंखें खोलीं और मुझसे बैठने को कहा.
मैंने उनसे पूछा कि उन्हें कोई प्रॉब्लम है क्या?
उन्होंने कहा- प्रॉब्लम कुछ नहीं है, बस तेरी भाभी नहीं है, तो अकेला फील करता हूँ.
मैंने कहा- ये भी कोई बात हुई … हम सब हैं ना, आप हमारे साथ बातें करो.
उन्होंने कहा- तुम समझती नहीं हो, रहने दो!
मैंने उन्हें काफी परेशान किया.
तो उन्होंने कहा- भाभी की जगह कोई और नहीं ले सकता, कोई मेरी बीवी की तरह मेरी केयर नहीं कर सकता.
मैंने कहा- केयर तो हम सब करते हैं आपकी.
फिर उन्होंने कहा- ऐसी काफी बातें हैं जो मैं तुमसे चाह कर भी नहीं कह सकता.
मुझे पता नहीं क्या हुआ कि मैंने बोल दिया- मान लीजिए मैं भाभी ही हूँ, अब तो ये उदासी हटाइए!
वे हंसने लगे और कहने लगे- ये इतना आसान होता तो क्या बात थी!
मैंने कहा- इसमें प्रॉब्लम क्या है, आप एज्यूम तो कर ही सकते हैं!
वे बोले- तेरी भाभी मेरे लिए काफी कुछ करती है, तुम कर सकोगी?
मैंने उनका मन रखने के लिए कह दिया- हां, क्यों नहीं करूँगी!
फिर उन्होंने कहा- देखते हैं. आज से जब तक तुम्हारी भाभी नहीं आती, तुम उसकी जगह मेरी बीवी बन के रहना, मंजूर है?
मैंने थोड़ा सोचते हुए कहा- ठीक है.
मुझे लग गया था कि भैया किस बारे में बात कर रहे हैं, फिर भी मैंने हां कह दिया क्योंकि एक तो मुझे भाभी के बिना वे अजीब से लग रहे थे और दूसरी बात ये कि मुझे लगा भैया थोड़ा मज़ाक करेंगे, उससे ज़्यादा कुछ नहीं.
लेकिन भैया सीरियस थे.
उन्होंने कहा- सोच लो. मेरी बीवी मेरी सारी बातें मानती है, तुम्हें अगर कोई प्रॉब्लम है तो अभी बोलो … और मुझे ऐसे ही रहने दो. नहीं तो मेरी सारी बातें मानो.
मैंने हां कह दिया.
वे खुश हो गए और मुझसे बोले- पहला काम ये कि मुझे मेरी बीवी को साड़ी में देखना है.
मैं यूजुअली सलवार-कमीज़ पहनती थी तो मैंने उनसे कहा कि अब शाम में मैं अचानक से साड़ी में कैसे आऊं!
उन्होंने कहा- मैं नहीं जानता. तुम्हें बात माननी होगी. अभी नीचे जाओ, लेकिन खाना खाने के बाद साड़ी पहन कर ऊपर आना.
मैंने कहा- रात में मैं मम्मी को बताए बिना ऊपर नहीं आ सकती!
उन्होंने कहा- वह सब तुम मेरे ऊपर छोड़ दो.
मैं नीचे चली आई.
थोड़ी देर बाद भैया नीचे आए और मम्मी से कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है और आज वे देर से खाना खाएंगे. अगर पॉसिबल हो तो खाना ऊपर भिजवा दें.
मम्मी ने तुरंत मान लिया.
मैं तो जानती ही थी कि ये बहाना क्यों है.
मम्मी-पापा उम्र की वजह से ऊपर वाले फ्लोर पर बहुत कम ही जाते थे.
जब रात में 10 बजे के आस-पास मम्मी-पापा ने खाना खा लिया और सोने जाने लगे तो मम्मी ने मुझसे कहा- खाने से पहले याद से भैया को खाना दे आना.
ये कहकर मम्मी सोने चली गईं.
मैंने किचन का बाकी काम किया और जब मम्मी सो गईं तो मैं अपने कमरे में आई.
मैंने मम्मी की साड़ियों में से एक ब्लैक शिफॉन साड़ी निकाली और जल्दी-जल्दी कपड़े चेंज करके रेडी हो गई.
मुझे बहुत अजीब सा लग रहा था, इस तरह छुपकर रात में भैया के पास जाना. लेकिन काफी एक्साइटमेंट भी थी.
एक सुकून भी था कि अगर किसी ने देखा तो कह सकती हूँ कि मम्मी ने ही खाना ले जाने को कहा था.
खैर … मैं खाना लेकर भैया के पास गई. उनका कमरा खुला हुआ था.
कमरे के अन्दर अंधेरा था और लाइट भी नहीं जल रही थी.
मैंने लाइट ऑन की तो देखा भैया बस एक पायजामा में लेटे हुए थे.
उन्होंने मुझे अन्दर बुलाया.
भैया मुझे साड़ी में देखकर काफी खुश हुए और बोले- मेरी बीवी साड़ी में इतनी सुंदर लगती है, मुझे पता नहीं था!
मैं ये सब बातें सुनकर शर्मा रही थी.
मुझे पता था कि मैं साड़ी में काफी अच्छी दिखती थी.
मैंने कहा- अब आप खाना खा लो ताकि मैं जल्दी से वापस जाऊं. मम्मी जाग गईं तो मैं क्या जवाब दूँगी?
भैया बोले- ये तुम्हें मुझे प्रॉमिस करने से पहले सोचना चाहिए था. मेरी बीवी तो मेरे साथ ही खाना खाएगी!
मैंने उन्हें खाना दिया और अपने लिए भी निकाला.
तभी उन्होंने मुझे कहा- यहां मेरी गोद में आकर बैठकर खाओ!
मुझे उनसे इस बात की उम्मीद नहीं थी.
इससे पहले कि मैं ना करती, उन्होंने मुझे खींचकर अपनी गोद में बिठा दिया.
उन्होंने एक निवाला अपने मुँह में आधा डाला और मुझसे कहा- आधा तुम काटो इसमें से.
मुझे शर्म तो आ रही थी लेकिन ये गेम अच्छा भी लग रहा था.
मैंने उनके मुँह के निवाले को आधा काट लिया.
इसी तरह हमने थोड़ा खाना खाया.
फिर एक बार उन्होंने निवाला पकड़ा, और जैसे ही मैंने आधा काटने की कोशिश की, उन्होंने निवाला मुँह के अन्दर ले लिया.
जल्दी-जल्दी में मेरे होंठ उनके होंठों से मिल गए.
जब तक मैं हटती, उन्होंने मुझे मेरे होंठों पर एक छोटा सा किस दे दिया.
मैं शर्म से लाल हो गई.
ये पहली बार था, जब किसी ने मुझे किस किया था.
मैं भागना चाहती थी लेकिन भैया ने मुझे भागने नहीं दिया.
वे बोले- मैं तो अपनी बीवी को कहीं भी किस कर सकता हूँ, इसमें इतना शर्माने की क्या बात है!
मैं चुप करके बैठ गई.
ऐसे ही खाना खाते हुए उन्होंने मुझे कई बार किस किया.
एक-दो बार तो उन्होंने मेरा निचला होंठ धीरे से काट भी लिया … और जब मैंने कोई प्रतिरोध नहीं किया तो एक बार उन्होंने उसे अपने मुँह में लेकर चूस ही लिया.
मैं ये सब करते-करते धीरे-धीरे एक्साइट हो रही थी.
मुझे अजीब सा लग रहा था, मैं काफी मुश्किल से सांस ले पा रही थी.
भैया का भी कुछ ऐसा ही हाल था.
क्योंकि मैं उनकी गोद में थी, मुझे अपनी गांड पर उनका गर्म लंड महसूस हो रहा था.
उनके लौड़े का वह अहसास धीरे-धीरे बढ़ता ही जा रहा था क्योंकि उनका लंड धीरे-धीरे बड़ा होता जा रहा था.
मेरी चुत में से पानी आने लग गया था.
मैं नहीं चाहती थी कि भैया को पता चले कि मैं एक्साइट हो रही हूँ.
मैंने भैया से कहा- अब मैं चलती हूँ. आपका खाना तो हो गया ना?
भैया ने मुझे रोक लिया और फिर से ज़ोर देते हुए अपनी गोद में बिठा लिया.
अब मैं उनका लंड साफ़ महसूस कर रही थी.
मेरा मन उनके लंड को देखने का कर रहा था लेकिन डर भी लग रहा था.
फिर भैया ने अपना हाथ मेरी लेफ्ट जांघ पर रख दिया और धीरे-धीरे सहलाते हुए उसे ऊपर ले जाने लगे.
उनका दूसरा हाथ मेरी साड़ी के नीचे मेरे पेट पर पड़ा हुआ था.
मैं आज़ाद थी लेकिन भाग नहीं रही थी.
मुझे लगने लगा था कि भैया आज मुझे ऐसे नहीं जाने देंगे और मैं चुद जाऊंगी, लेकिन शायद मैं भी वही चाहने लगी थी.
भैया ने फिर कहा- आओ अनु, बेड पर चलकर थोड़ा आराम करते हैं.
मैंने सिर हिलाकर हां कह दिया.
भैया मुझे वैसे ही उठाए हुए बेड पर ले गए, मुझे लिटाकर मेरे साइड में हो गए.
अब वे मेरे जिस्म से पूरी तरह चिपके हुए थे.
भैया मुझे फिर से किस करने लगे.
इस बार मैंने भी ज़्यादा मना नहीं किया और थोड़ा उनका साथ देने लगी.
उन्हें समझ में आ गया कि मैं रेडी हो गई हूँ.
उन्होंने भी बिना देर किए मेरे ब्लाउज़ पर हाथ रख दिया और धीरे-धीरे मेरे दूध सहलाने लगे.
ये पहली बार था जब कोई मुझे ऐसे मम्मों पर छू रहा था.
मैं मादक सिसकारियां लेने लगी!
भैया ने एक हाथ मेरे पेट पर से ले जाते हुए अन्दर डालना चाहा लेकिन पेटीकोट टाइट था.
उन्होंने मेरे कान में धीरे से कहा- अब इसे क्यों पहन रखा है? मेरी बीवी मेरे साथ नंगी सोती है. कपड़े हटाकर आराम से लेटो न!
मैंने शर्म से आंखें बंद कर लीं.
भैया बोले- ठीक है, तुम आंखें बंद रखो, मैं ही कुछ करता हूँ.
ये कहकर भैया ने धीरे-धीरे मेरे कपड़े हटाने शुरू किए.
साड़ी तो मेरे पता होने से पहले ही गायब हो गई.
फिर भैया ने मेरे पेटीकोट की डोरी खोली.
उस दिन मैंने पेटीकोट के अन्दर कुछ नहीं पहन रखा था, तो मैं नंगी हो गई थी.
मैंने अपने पैर आपस में जोड़ लिए.
भैया ने धीरे-धीरे पेटीकोट को नीचे करना शुरू किया.
पेटीकोट मेरे लेटने की वजह से नीचे नहीं आ रहा था, तो उन्होंने मुझे मेरी गांड पर हाथ लगाकर थोड़ा सा उठाया और पूरा नीचे खींच दिया.
अब मैं कमर के नीचे बिल्कुल नंगी थी.
मेरी आंखें अभी भी बंद थीं.
भैया ने फिर ब्लाउज़ के ऊपर से ही मेरे बूब्स दबाए.
मैंने उन्हें ज़ोर से पकड़ लिया था.
उसके बाद भैया ने मेरे ब्लाउज़ के हुक खोले और मेरे शरीर पर पहने हुए आखिरी कपड़े भी निकल गए.
मुझमें आंख खोलने की हिम्मत नहीं थी क्योंकि मैं भैया के सामने बिल्कुल ही नंगी थी.
थोड़ी देर बाद भैया ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने शरीर से होते हुए अपने लंड पर रख दिया.
मैंने झटके से हाथ हटा लिया. मुझे बहुत शर्म आ रही थी.
भैया ने कहा- अब कैसी शर्म! हम हज़्बैंड-वाइफ हैं, कोई अजनबी तो हैं नहीं. मैंने तुम्हें देख ही लिया है, अब तुम भी मुझे देख लो!
मैंने आंखें खोलीं और 1 सेकंड में मेरी सारी एक्साइटमेंट डर में बदल गई.
मैंने ब्लू फिल्म्स में तना हुआ लंड देखा था लेकिन भैया का लंड देखकर ही मेरे पसीने छूट गए.
यह औसत साइज़ से थोड़ा सा लंबा था लेकिन काफी मोटा था.
मैं तो सोच कर ही डर गई कि इसे भाभी कैसे अन्दर लेती होंगी.
भैया ने शायद मेरी हालत समझ ली थी.
उन्होंने मुझसे कहा- डरो नहीं! सभी लड़कियां पहली बार ऐसे ही सोचती हैं, लेकिन सब ले लेती हैं. मैं तुम्हें सिखाऊंगा कि कैसे लेते हैं.
मुझे अब पता चल गया था कि आज मेरा चुदना निश्चित है, मेरे मन में भी चुत चुदाई की लालसा जाग गई थी.
इसलिए मैंने भी ज़्यादा ना नुकुर नहीं की.
मैंने बस भैया से इतना कहा- प्लीज़ धीरे कीजिएगा! ये मेरा पहला टाइम है. मैं शायद ना झेल पाऊं.
भैया हंसने लगे.
फिर उन्होंने मुझे सीधा लिटा दिया और मेरे पैरों के बीच आ गए.
मैंने अपनी टांगें फैला दी थीं.
भैया ने मुझे किस किया और मेरे बूब्स दबाने लगे.
मेरा डर धीरे-धीरे जाने लगा.
फिर भैया ने मेरी चुत सहलानी शुरू की.
वे मेरी चुत के दाने को थोड़ा सहलाते, फिर अपनी एक उंगली क्लिट से लेकर मेरी गांड की छेद तक ले जाते.
ऐसा कुछ वे 5 मिनट तक करते रहे.
बीच-बीच में मुझे चूमते और बूब्स चूसते.
मैं काफी एक्साइटेड हो गई थी और सिसकारियां लेने लग गई थी.
भैया ने मेरी हालत समझते हुए मेरी चुत के छेद पर अपना लंड रखा और धीरे से एक धक्का दिया.
उनका लंड चुत से फिसल कर नीचे आ गया.
भैया ने दोबारा ट्राई किया और लंड अपने हाथ में पकड़ कर अपना सुपारा ठीक छेद पर रखकर थोड़ा ज़ोर से धक्का मारा.
उनका लंड सट से अन्दर घुस गया और मुझे तो लगा मैं मर गई!
मैं ज़ोर से चीख पड़ी.
भैया ने जल्दी से लंड निकाल लिया और बोले- तुम ऐसी करोगी और कोई आ गया तो!
मैंने कहा- मुझे इतना दर्द पहले कभी नहीं हुआ!
भैया बोले- ठीक है, अब आराम से करूँगा.
उन्होंने मुझे फिर से किस करना शुरू किया.
मैं नॉर्मल होने लगी.
मुझे किस करते हुए अचानक से भैया ने पूरा ज़ोर से धक्का दिया और उनका लगभग आधा लंड मेरी चुत में उतर गया.
भैया ने इस बार मेरा मुँह अपने मुँह में लिया हुआ था तो मैं इतनी ज़ोर से नहीं चीख सकी, लेकिन फिर भी चीख निकल ही गई.
मैं रोने लगी थी.
भैया मुझे समझाने लगे थे.
वे बोले- जितना दर्द होना था हो गया, अब कुछ नहीं होगा!
लेकिन मैं कुछ नहीं सुनना चाहती थी.
मैंने रोते हुए कहा- प्लीज़ निकाल लीजिए! मैं मर जाऊंगी. मुझसे आपका लंड नहीं लिया जाएगा!
भैया ने मुझसे कुछ देर वैसे ही रुकने को कहा.
मैं वैसे ही अपनी चुत में उनका आधा लंड लिए लेटी रही.
कुछ मिनट बाद भैया ने पूछा- अब ठीक है ना?
मैंने हां में सिर हिलाया.
भैया खुश हो गए और उन्होंने मुझे जोर से किस कर लिया.
फिर उन्होंने मेरी टांगें फैलानी शुरू की.
मैंने कहा- बस भैया, इतने में ही करो! अब और अन्दर मत करना!
भैया मुझसे बोले- जब तक पूरा अन्दर नहीं जाता, तुम्हें मज़ा कैसे आएगा!
मैंने भी सोचा कि अब जब इतना दर्द झेल ही लिया है, तो फिर पूरा ही काम करवा लेती हूँ.
भैया को धीरे करने को कहकर मैंने अपने पैर फैला दिए.
भैया ने फिर थोड़ा सा बाहर खींचकर लंड फिर अन्दर धकेला.
ऐसा करते-करते थोड़ी देर में पूरा लंड मेरी चुत में उतर गया था.
भैया ने मुझसे पूछा- कैसा लग रहा है?
मैंने हंस कर कहा- अच्छा लग रहा है!
भैया ने कहा- अब और मज़ा आएगा! बस लेती रहो!
फिर वे मुझ पर पूरा लेट गए और मेरी चुदाई शुरू हो गई जो कि ऑलमोस्ट 20-25 मिनट चली.
मैं इस बीच 2-3 बार झड़ गई थी.
भैया का स्टैमिना काफी अच्छा था.
फिर अचानक से भैया ने अपनी चुदाई की स्पीड तेज कर दी और मुझसे पूछने लगे- तुम्हारी चुत में पानी छोड़ दूँ?
मैंने कहा- हां, अन्दर ही निकालिए! मेरा सेफ पीरियड चल रहा है.
ये सुनकर भैया ने स्पीड और तेज कर दी और कुछ सेकंड्स बाद अपना लंड पूरा अन्दर धकेल कर मुझ पर लेट गए.
अगले एक मिनट तक वो मेरे अन्दर अपना पानी छोड़ते रहे.
मुझे लगा कि जैसे पानी अभी बाहर आ जाएगा.
फिर एक मिनट बाद भैया ने अपना लंड बाहर निकाला.
उनका लंड अब नॉर्मल शेप में आ चुका था.
मेरा पूरा शरीर दर्द कर रहा था.
फिर भैया ने तौलिए से अपना लंड साफ किया और मुझसे बोले- चखना चाहोगी? तुम्हारी भाभी तो डेली मुँह में लेती है!
मैंने आज उन्हें पूरा खुश करने का मन बना लिया था तो मैंने उनका लंड चाटना शुरू किया.
मुझे वीर्य का टेस्ट कुछ अजीब सा लगा लेकिन मैं भैया को नाराज नहीं करना चाहती थी.
थोड़ी देर चाटने के बाद उनका लंड बड़ा होना शुरू हो गया.
मैंने पहले उनका सुपारा चूसना शुरू किया, फिर लंड अन्दर लेने लगी.
पूरा लंड तो मेरे मुँह में आ नहीं सकता था लेकिन मैंने काफी अन्दर ले लिया था.
भैया काफी एक्साइट हो गए थे.
उन्होंने मेरा सिर पकड़ कर आगे-पीछे करना शुरू कर दिया था.
कुछ देर ऐसा करने के बाद अचानक से उनका सुपारा बड़ा होने लगा और उन्होंने मेरा सिर ज़ोर से पकड़ लिया.
मैं समझ गई थी कि भैया झड़ने वाले हैं.
तुरंत ही भैया ने पिचकारी छोड़ दी.
मेरा मुँह पूरी तरह से भर गया.
मैं उनका पानी थूकना चाहती थी लेकिन भैया ने लंड नहीं निकाला और मुझे थोड़ा सा पीना पड़ गया.
थोड़ी देर बाद जब हम नॉर्मल हुए तो भैया ने मुझे थैंक्स कहा और बोला- आज मुझे अपनी बीवी की कमी नहीं लग रही! काश तुम मेरी बीवी होती तो हम हमेशा ये खेल सकते!
मैंने कहा- आज से मैं आपकी पत्नी ही हूँ! जब तक भाभी नहीं आती, आप मुझे कभी भी बुला सकते हैं.
भैया खुश होकर मेरे होंठ चूसने लगे.
इसके बाद पूरे महीने हमारी फुल चुदाई चलती रही.
भाभी के आने के बाद भी जब भी हमें मौका मिलता, हम अपना खेल खेल लेते.
ये मेरी सच्ची न्यू गर्ल फक स्टोरी है. आपको अच्छी लगी होगी.
कमेंट दीजिएगा.