गाँव Xxx कहानी में मैं गांओं का झोला छाप डॉक्टर हूँ. लड़कियों के चूतड़ों पर सुई लगाकर मजा लेता हूँ. ऐसे ही एक विधवा भाभी के दोनों कूल्हों पर सुई लगाई तो वह सेट हो गयी.
अंतर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार!
मैं डॉ. गौतम, यू.पी. का रहने वाला हूँ।
मेरा एक छोटे से गाँव में दवाखाना है, जिस गाँव में मैं अकेला ही रहता हूँ।
गाँव में अभी मैं ही अकेला डॉक्टर हूँ; एक और डॉक्टर थे, जिनका कोरोना के समय निधन हो गया था।
मैं एक झोलाछाप डॉक्टर हूँ और गाँव में लगभग सभी का इलाज करता हूँ।
गाँव के लोग गरीब हैं, तो कम पैसे में इलाज करवाना उनकी मजबूरी है, इसलिए मेरा दवाखाना बहुत चलता है।
अब आगे आते हैं गाँव Xxx कहानी पर।
मेरे गाँव में सभी प्रकार के लोग हैं। मैं लोगों का इलाज करके उनको इंजेक्शन देता हूँ।
अक्सर सभी महिलाओं को दो इंजेक्शन तो देता ही हूँ, और कहाँ देता हूँ, तो यह आप सभी जानते हैं— उनके कोमल-कोमल कूल्हों में!
कुछ महिलाएँ शांति से लगवा लेती हैं, कुछ महिलाएँ थोड़ा-बहुत चिल्लाती हैं और कुछ महिलाएँ रोने लगती हैं.
अक्सर कम उम्र की महिलाएँ मुझे बोलती हैं कि हाथ में दे दो, मगर मैं तो ठहरा ठरकी, कहाँ हाथ में दूँगा! और उनकी मजबूरी हो जाती है इंजेक्शन लेना।
गाँव में ही एक भाभी हैं, जिनके पति का कोरोना में निधन हो गया था।
उनके पति किसी अच्छी सरकारी जॉब में थे।
निधन के बाद उनको अनुकम्पा नियुक्ति मिली, तो वह गाँव में ही किसी ऑफिस में क्लर्क के पद पर हैं।
उनके एक बेटा है, जिसकी उम्र लगभग 6 साल है।
इसके पहले मैंने उनके बेटे को करीब 2-3 बार सुई दी है, जब वह बीमार हुआ था।
एक दिन मैं अचानक दवाखाने पर खाली बैठा था, तो मैंने देखा कि भाभी अपने बेटे के साथ मेरे क्लिनिक की ओर आ रही हैं।
मुझे लगा शायद बेटा फिर से बीमार होगा।
उस समय मैं अपने क्लिनिक में खाली बैठा हुआ था।
मैं आप लोगों को अपने क्लिनिक के बारे में बता दूँ— मेरा क्लिनिक लगभग 8 फीट x 10 फीट का है और सिंगल रूम का क्लिनिक है, जैसा कि अक्सर झोलाछाप डॉक्टरों का रहता है।
पीछे वाली दीवार के पास में एक पर्दा लगा हुआ है और पर्दे के पीछे एक बेंच है।
पर्दे के सामने मेरी एक टेबल-चेयर और पेशेंट के लिए स्टूल है।
सामने पेशेंट लोगों के लिए एक बेंच भी रखी हुई है।
मेरी टेबल के साइड में एक अलमारी रखी हुई है, जिसमें दवाई वगैरह रखता हूँ।
भाभी और उनके बेटे के आने पर मैंने उनका वेलकम किया और बैठने को कहा।
भाभी का नाम मालती (बदला हुआ नाम) था।
वह बिल्कुल हुस्न की मल्लिका थीं! उनका फिगर का साइज लगभग 34-34-36 है और उन्होंने उस दिन काले रंग की साड़ी, काला पेटीकोट और लाल ब्लाउज पहना हुआ था।
साड़ी में से उनकी झांकती हुई नाभि बहुत ही खूबसूरत लग रही थी।
मैंने भाभी से पूछा, “क्यों, बेटा बीमार है क्या?”
भाभी ने कहा, “नहीं भैया, मैं बीमार हूँ!”
इतना सुनते ही मेरे अंदर खुशी की लहर दौड़ने लगी।
मैंने भाभी को स्टूल पर बिठाया और उनका बेटा वहीं बेंच पर बैठकर मोबाइल में खेल रहा था।
मैंने भाभी से कहा, “बताइए, क्या परेशानी है?”
उसने कहा, “भैया, 2 दिनों से अनमना सा लग रहा है, बहुत बेचैनी हो रही है! पूरे शरीर में दर्द है और फीवर भी है।”
मैंने पर्ची ली और उनका नाम और उम्र पूछा।
उसने बताया, “मालती, 34।”
मैंने पूछा, “भाभी, कोई दवाई वगैरह ली थी क्या आपने?”
उसने कहा, “दर्द की गोली बस खाई है कल।”
मैंने स्टेथो लेकर अपने कान में लगाया और उनके ब्रेस्ट में लगभग 6 बार लगाकर उनको ज़ोर-ज़ोर से साँस लेने को बोलने लगा।
इसके बाद मैंने थर्मामीटर लिया और उनसे कहा, “भाभी, इसे ब्लाउज स्लाइड करके अपनी बगल में लगा लो।”
उसने अपने ब्लाउज के 2 हुक खोलकर स्लाइड किया।
मैंने थर्मामीटर उसकी बगल में लगा दिया, जिससे उसके ब्रेस्ट के ऊपर का हिस्सा विज़िबल था, बट उसने उसे साड़ी के पल्लू से ढक लिया।
फिर मैंने उसकी साड़ी में से झांकती नाभि को देखा और 3-4 बार उसकी साड़ी के अंदर से पेट को दबाकर चेक किया।
फिर मैं अपनी चेयर से खड़े होकर साइड वाली अलमारी में से 2 सिरिंज और 2 एम्प्यूल निकाला।
सुई देखकर उसे डर लगने लगा, वह डरी-डरी सी लग रही थी।
मैंने उसकी तरफ देखा और बोला, “भाभी, 2 इंजेक्शन लगना है आपको, आप रेडी हो जाइये!”
उसने कहा, “डॉक्टर साहब, इंजेक्शन से बहुत डर लगता है, प्लीज आप गोली दे दीजिये!”
मैंने कहा, “गोली भी दूँगा और यह इंजेक्शन भी लगाऊँगा। अभी 2 इंजेक्शन लगेगा और कल 1 लगेगा।”
अब उसके पास कोई भी ऑप्शन नहीं था, तो वह आखिरकार राजी हुई।
उसने पूछा, “भैया, कहाँ लगेगा?”
मैंने कहा, “भाभी, कूल्हों में लगेगा, आप सैंडल उतार कर पीछे बेंच में लेट जाइये।”
उसने कहा, “भैया, हाथ में दे दीजिये!”
मैंने कहा, “भाभी, यह इंजेक्शन पीछे ही लगाता हूँ, हाथ में नहीं दे सकते!”
अब उसका चेहरा शर्म से लाल होने लगा था।
मैंने अपना पहला इंजेक्शन लोड करना शुरू किया और वह खड़ी होकर अंदर जाने लगी।
जाते-जाते अपने पेटीकोट का नाड़ा खोलते हुए अंदर गयी।
मैं भी पहला इंजेक्शन लोड कर उसके पीछे-पीछे चला गया।
भाभी वहाँ उलटी लेटी हुई थीं और अभी मेरे सामने काला ब्लाउज, उसके नीचे गोरी मखमली पीठ और उसके नीचे फिर काली साड़ी सच में चार चाँद लगा रहे थे।
मैंने भाभी से कहा, “भाभी, किसका वेट कर रही हो? हम दोनों ही हैं यहाँ, साड़ी नीचे करिये।”
उसने “हाँ” बोलकर थोड़ी सी साड़ी नीचे खिसकाई।
उसने साड़ी इस कदर नीचे की कि उसकी पेंटी के दर्शन नहीं हुए थे।
मैंने कहा, “भाभी, यह इंजेक्शन दर्द देगा तो थोड़ा नीचे लगेगा, और नीचे करिये।”
वह थोड़ा और नीचे कर ही रही थी कि इतने में मैंने ही उसकी हेल्प की, और उसके कूल्हे की क्लीवेज अच्छे से दिख रही थी और आधा दायाँ कूल्हा मेरे सामने पंक्चर होने के लिए रेडी था।
मैंने सिरिंज में से एयर बबल निकाला और वह यह देखकर बहुत घबरा गयी।
उसने धीमी आवाज़ में कहा, “भैया, धीरे लगाना!”
मैंने कहा, “भाभी, आप सामने मुँह करो और कमर को ढीली छोड़ो।”
मैंने कॉटन से रब किया और धीरे से नीडल जैसे ही अंदर घुसाया, उसने ज़ोर से कहा, “आउच!”
फिर मैंने धीरे-धीरे पूरी नीडल अंदर डाल दी और फिर प्लंजर प्रेस करना स्टार्ट किया।
1ml होने पर उसकी सिसकारी निकलने लगी और जैसे ही इंजेक्शन 2ml कम्प्लीट हुआ, वह “निकालो, निकालो!” कहने लगी।
मैंने 2ml पूरा करके नीडल बाहर निकाला और हाथ से मलने लगा, और उसकी साड़ी के अंदर से सिर्फ पेंटी को ऊपर किया और पेंटी के ऊपर से मलने लगा।
उसने पिंक कलर की फूल वाली पेंटी पहनी हुई थी, जिसमें वह बहुत ही सुन्दर लग रही थी।
फिर मैंने उसे मलने को कहकर बाहर आकर दूसरा इंजेक्शन लोड किया और उसको लेकर अंदर गया।
उसने दूसरे साइड से साड़ी को नीचे किया, फिर मैंने और खिसकाया और उसके बायीं तरफ के कूल्हे में जैसे ही नीडल को घुसाया, वह “आह हह हहह मम्मी!” करने लगी।
जैसे ही मैंने प्लंजर दबाना स्टार्ट किया, उसने मोनिंग स्टार्ट कर दी।
इस बार उसे ज्यादा दर्द हो रहा था, इंजेक्शन 3ml का था। बट जैसे ही इंजेक्शन 2ml हुआ, उसने रोना शुरू कर दिया।
फिर मैंने “बस, बस, हो गया” कहा और 3ml इंजेक्शन कम्प्लीट करके उसकी पेंटी को ऊपर किया और हथेली से लगभग 1 मिनट तक घिसा।
मैं बाहर आकर अपनी चेयर पर बैठ गया।
वह लगभग 2 मिनट बाद बाहर आई और स्टूल पर बैठी।
मैंने कहा, “भाभी, ज्यादा दर्द हुआ क्या?”
उसने कहा, “सर, बहुत दर्द हुआ और अभी भी दे रहा है!”
फिर मैंने उसे कुछ मेडिसिन दी और अपना नंबर भी दिया कि अगर कोई दिक्कत हो तो कॉल करके पूछ लेना।
वह घर चली गयी।
फिर रात में करीब 10:30 बजे मुझे व्हाट्सएप में एक अनजान नंबर से मैसेज आया।
उसमें “Hi” लिखा था.
मैंने भी “Hi” रिप्लाई दिया तो उसका जवाब आया कि आज आपके यहाँ इंजेक्शन लगवाने आये थे तो बहुत दर्द दे रहा है।
मैंने कहा, “किसे?”
उसने कहा, “मुझे!”
अभी तक उसने अपनी आइडेंटिटी नहीं बताई थी।
मैंने कहा, “कहाँ लगा था इंजेक्शन?”
उसने कहा, “पुट्ठे में 2 इंजेक्शन!”
मैंने कहा, “बर्फ से सिकाई कर लो, ठीक हो जाएगा।”
फिर हमारी धीरे-धीरे चैट होना शुरू हुई।
अगले दिन वह फिर से आई अपना बचा हुआ 1 इंजेक्शन लेने, बट अब मालती पहले दिन से थोड़ा बेशरम लग रही थी।
उसके आने पर मैंने इंजेक्शन लोड करना शुरू कर दिया।
उसने आज पीले रंग की लेगिंग और लाल रंग का कुर्ता पहना हुआ था।
लोड होने पर वह अंदर चली गयी।
मैं जब अंदर गया तो वह पेट के बल लेटी हुई थी।
मैंने कहा, “भाभी, आज किस साइड लगवाना है सुई?”
उसने कहा, “भैया, दायीं तरफ ही लगा दो!”
जिसमें कल पहला वाला इंजेक्शन लगा था, क्योंकि दूसरा वाला इंजेक्शन तो बहुत दर्द दे रहा था।
फिर मैंने उसका कुर्ता ऊपर करके पलटा दिया और दायीं तरफ से लेगिंग लगभग 3/4 नीचे की।
उसके कूल्हे के क्लीवेज दिख रहे थे।
मैंने यह इंजेक्शन लगाया तो उसे आज भी रोना आ गया।
फिर वह चली गयी।
धीरे-धीरे हमारी बातें बढ़ती चली गईं।
वह हमेशा कहती थी, “अब तुमसे इंजेक्शन नहीं लगवाऊँगी, बहुत ज़ोर से देते हो!”
उसे मोहल्ले की बाकी महिलाओं ने भी बताया था कि डॉ. गौतम बहुत तेज़ सुई लगाते हैं।
फिर धीरे-धीरे हम लोग और करीब आने लगे।
वह अपने पति के बारे में याद करके रोने लगती थी, वह बहुत प्यार करती थी अपने पति से.
धीरे-धीरे हम बहुत अच्छे दोस्त बन गए और उसके बाद वह मेरी जीएफ बन गयी.
और खुलते-खुलते हम चैट में रोमांटिक होने लगे.
उसके बाद हम लोग सेक्स वगैरह की बातें भी चैट में और फ़ोन में करने लगे।
उसने मुझसे पूछा, “आपकी कोई जीएफ पहले थी?”
मैंने कहा, “हाँ, पहले थी।”
फिर उसने पूछा, “आपने कभी सेक्स किया था उसके साथ?”
मैंने कहा, “मेरा बहुत मन था, किन्तु वह मना कर देती थी।”
उसकी बातों से लगता था कि ये सब बातें करते-करते उसकी चूत गीली हो जाती थी।
मैंने एक-दो बार मिलने पर उसके बूब्स भी दबाए हैं।
इसके बाद हम लोग बीच-बीच में मिलने भी लगे।
मेरा जब बर्थडे आया तो उसने कहा, “मेरे राजा, क्या चाहिए तुम्हें गिफ्ट?”
मैंने कहा, “वही जो हर एक बॉयफ्रेंड को चाहिए!”
शुरू में तो वह मुझसे गुस्सा हो गयी, फिर मैंने धीरे से मनाया तो वह मान गयी।
अब हमारा प्लान हुआ कि रात में वह 7 बजे मेरे घर आएगी
करीब 7:25 में वह और उसका बेटा मेरे घर आए।
उसने सफ़ेद रंग की लेगिंग और नीले रंग का कुर्ता पहना था।
मैंने उसको अंदर बैठाया।
फिर हम लोग आधे घंटे लगभग वहीं बैठे रहे.
फिर उसने बताया कि उसे जल्दी घर भी लौटना है।
मैंने उसके बेटे को मेरे मोबाइल में गेम लगाकर दे दिया और मैं मालती के साथ अंदर बेडरूम में आ गया और कमरा अंदर से बंद कर लिया।
दरवाजा बंद करते ही मैंने उसे दीवार में टिकाकर उसका चुम्बन लेना शुरू किया।
करीब 5 मिनट तक चुम्बन लेते-लेते मेरे हाथ उसके बूब्स को मसलने लगे और देखते ही देखते मैंने उसके कुर्ते को ऊपर करके उतार दिया।
अब मेरे सामने वह काली ब्रा में खड़ी थी।
मैंने पीछे हाथ ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोला और उसके मम्मों को आज़ाद किया।
मम्मों को मसलते-मसलते मैंने अपना हाथ नीचे ले जाना शुरू किया और उसके चूतिड़ को लेगिंग के ऊपर से ही मसलने लगा।
फिर उसने मेरी शर्ट उतारी और मैंने उसे बिस्तर में पटक दिया।
अब मैंने उसकी लेगिंग को उतार कर नीचे कर दिया, लगता है आज ही वैक्स करवाया था।
अब वह मेरे सामने बस लाल रंग की पेंटी में थी।
मैंने अपना जींस उतारा और अपनी बनयान और चड्डी भी उतार दी।
मैंने उसके शरीर का ऊपर से नीचे तक और आगे से पीछे तक चुम्बन किया और फिर उसकी पेंटी को भी निकाल कर फेंक दिया।
अब मैंने उसकी टाँगें मोड़कर उसकी चूत के पास अपने लंड को सटाकर बैठ गया और उसकी चूत के दरवाजे में स्पर्श कराने लगा।
उसने कहा, “कंडोम लगा लो!”
मैंने कहा, “एक गर्भनिरोधक इंजेक्शन लगा दूँगा तो 03 महीने तक आराम रहेगा!”
उसने कहा, “यह पहली और आखिरी बार है, इसके बाद नहीं!”
मैंने धीरे से उसकी चूत के दरवाजे में सेट किया।
मेरे दोनों हाथ उसके दोनों हाथों को पकड़े हुए थे और साथ में मम्मों को भी मसलते जा रहे थे।
फिर मैंने हल्का सा ज़ोर लगाया तो लंड बाहर फिसल गया।
मैंने इस बार एक हाथ से लंड को सेट किया और जैसे ही झटका मारा, तो लगभग 1 इंच लंड अंदर गया और उसे बहुत दर्द हो रहा था।
मैंने हल्का सा लंड को पीछे खींचा और इस बार थोड़ी ताकत लगाकर पेला, तो लंड लगभग 2 इंच अंदर गया और वह छटपटाने लगी!
उसके मुँह से चिल्लाने की आवाज़ भी आई।
फिर मैंने उसको समूच करना शुरू किया और लंड को बाहर निकालकर फिर से अंदर डाला, तो उसके आँसू आना शुरू हो गए; उसे बहुत दर्द हो रहा था।
इस बार लंड अपनी सीमा तक लगभग 5 इंच पहुँच चुका था।
मुझे लग नहीं रहा था कि इसकी इतनी टाइट चूत होगी, वैसे 4-5 साल से अनचुदी चूत तो टाइट हो ही जाती है।
फिर मैंने धीरे-धीरे धक्के बढ़ाने शुरू कर दिए और 5 मिनट बाद वीर्य आने लगा, तो लंड को बाहर निकालकर उसके पेट पर गिरा दिया।
फिर हमने जल्दी-जल्दी 1 राउंड और मारा, इस बार भी वह रोने लगी थी।
इसी तरह कहानी और भी है, अगली बार बताएँगे कि कैसे मैंने उसकी गांड मारी!